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Maid for Life - TGTF-Comics Part - 1












































































































































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Riya D'souza

मैं अपने बड़े समाज के लोगों के साथ कोजागिरी की रात मनाता था , जिसे शरद पूर्णिमा भी कहते हैं। मेरे लिए कोजागिरी की रात किसी मेले से कम नहीं थी , क्यूंकि हमारे शहर के बीचोबीच एक बहुत बड़े मैदान में इसका आयोजन हर साल होता और इस मेले में बहुत सी सुहागिन महिलाएं अपने अपने पतियों और बाल बच्चों के साथ एन्जॉय करने आते। कोजागिरी की रात कुंवारी लडकियां भी आती , जिनकी शादी होने वाली होती और घर के बड़े लड़के के लिए भी ये रात उतनी ही इम्पोर्टेन्ट थी , क्यूंकि इसका बहुत महत्ता थी। इस दिन रात में मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के लिए निकलती हैं और कहते हैं कि दिवाली के अलावा साल में मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए यह तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है। मान्यता है कोजागरी पूर्णिमा की रात जो घर में साफ - सफाई कर मां लक्ष्मी की विधिवत उपासना करता है , देवी उस पर अपनी विशेष कृपा बरसाती हैं और जीवन में उसे कभी धन , सुख - समृद्धि की कमी नहीं होती। लेकिन...

साजिद से मिसेज़ साज़िया बनने का सफर

मेरा नाम साजिद खान है और मैं कानपूर का रहने वाला हूँ। मैं बचपन से ही पढ़ने में बहुत ही ब्रिलियंट था और मेरी समझदारी से मेरे काफी क्लास मेट्स जलते थे। लेकिन फिर भी मेरे जैसे इंटेलीजेंट लड़के को हमेशा अपने ग्रुप में रखते ताकि मैं उन्हें एग्जाम पास करवाने में उनकी मदद कर सकूँ। स्कूलिंग के ख़त्म होने के बाद ट्वेल्थ में जब मैं ट्वेल्थ के एग्जाम देने की तयारी कर रहा था तब इलेवेंथ में एक लड़के ने एडमिशन लिया जिसका नाम मोंटी था। और हम सभी ने मिलकर मोंटी की रैगिंग ली और फिर हम अपने एक्साम्स पर ध्यान देने लगे। ट्वेल्थ ख़त्म होने के बाद मैं कॉलेज में गया और वहां भी मैंने सेकंड ईयर, थर्ड ईयर और फोर्थ ईयर के स्टूडेंट्स की रैगिंग ली। तीन साल कब बीते, पता ही नहीं चला और बहुत जल्द कॉलेज ख़त्म करके मैंने एक सरकारी नौकरी भी पा लिया। गवर्नमेंट जॉब मिलने में बाद मैं बहुत ही ज्यादा बिज़ी रहने लगा और अपने काम में इतना मशगूल हो गया कि इस बात का ध्यान ही नहीं रहा कि मैं कब इक्कीस का हो गया। पढ़ाई पूरी तरह छोड़कर मैं सिर्फ नौकरी ही कर रहा था और मेरे इक्कीस के होते ही मेरे अम्मी अब्बू ने मेरा निकाह हिना से करवा दिया। ...

Two badass boys, a good boy and a genie! Short Story in Hindi

राहुल - प्लीज् साजिद, प्लीज् फारुख, डोंट डू डिस टू मी प्लीज्! साजिद - साले राहुल के बच्चे, एक तो तू हमारा जूनियर ऊपर से तू हमे नाम लेकर पुकारता है, अब तो तुझे कुछ ज्यादा ही पनीश करना पड़ेगा! फारुख - अबे इस लड़के को अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में दाखिला क्या मिला, ये तो खुद को चंगेज़ खान समझने लगा है। साजिद - अबे राहुल सुन, क्या सोचकर तूने रुखसार और फातिमा से दोस्ती की। अबे वो दोनों सीनियर है तेरी और तू हमारी गिर्ल्फ्रेंड्स को हमसे छीनना चाहता है। राहुल - नहीं साजिद, मैं ऐसा कुछ नहीं चाहता, वे खुद आयीं थीं मेरे पास! फारुख - अच्छा, बेवकूफ समझता है हम दोनों को! राहुल - नहीं फारुख, तुमदोनो ने ही तो कहा था कि उन दोनों को पढाई में हेल्प कर देने को, और तुम दोनों ने ही तो मुझे नाम लेकर बात करने को कहा था। फारुख - तो हम तुझे कुएं में कूदने को कहेंगे तो क्या तू उसी में कूद जायेगा! साजिद - हाँ, और अगर हम तुझे जो कहेंगे, वो करेगा तू! तहज़ीब नाम की कोई चीज़ भी है कि नहीं! राहुल - सॉरी! राहुल - नहीं फारुख, तुमदोनो ने ही तो कहा था कि उन दोनों को पढाई में हेल्प कर देने को, और तुम दोनों ने ही तो मुझे नाम...