राहुल - प्लीज् साजिद, प्लीज् फारुख, डोंट डू डिस टू मी प्लीज्! साजिद - साले राहुल के बच्चे, एक तो तू हमारा जूनियर ऊपर से तू हमे नाम लेकर पुकारता है, अब तो तुझे कुछ ज्यादा ही पनीश करना पड़ेगा! फारुख - अबे इस लड़के को अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में दाखिला क्या मिला, ये तो खुद को चंगेज़ खान समझने लगा है। साजिद - अबे राहुल सुन, क्या सोचकर तूने रुखसार और फातिमा से दोस्ती की। अबे वो दोनों सीनियर है तेरी और तू हमारी गिर्ल्फ्रेंड्स को हमसे छीनना चाहता है। राहुल - नहीं साजिद, मैं ऐसा कुछ नहीं चाहता, वे खुद आयीं थीं मेरे पास! फारुख - अच्छा, बेवकूफ समझता है हम दोनों को! राहुल - नहीं फारुख, तुमदोनो ने ही तो कहा था कि उन दोनों को पढाई में हेल्प कर देने को, और तुम दोनों ने ही तो मुझे नाम लेकर बात करने को कहा था। फारुख - तो हम तुझे कुएं में कूदने को कहेंगे तो क्या तू उसी में कूद जायेगा! साजिद - हाँ, और अगर हम तुझे जो कहेंगे, वो करेगा तू! तहज़ीब नाम की कोई चीज़ भी है कि नहीं! राहुल - सॉरी! राहुल - नहीं फारुख, तुमदोनो ने ही तो कहा था कि उन दोनों को पढाई में हेल्प कर देने को, और तुम दोनों ने ही तो मुझे नाम...
ज़ुबैर, २६ साल उम्र और स्लिम शरीर, पांच फुट सात इंच लम्बा और देखने में बहुत ही स्मार्ट। ज़ुबैर अपने अम्मी अब्बू का एकलौता था और बचपन से ही उसके अम्मी अब्बू ने उसकी सभी ख्वाहिशों को पूरा करते आये थे। इस वजह से ज़ुबैर के स्वभाव में ज़िद्दीपन छा गया था। कॉलेज में आते ही ज़ुबैर ने बहुत सी गर्लफ्रेंड बनाया जिनमे पहली नीतू और आखिरी नेहा थी। स्मार्टनेस के साथ साथ पढाई में भी ज़ुबैर बहुत ही अच्छा था। कॉलेज से निकलने के बाद ज़ुबैर नौकरी की तलाश में निकला और टाटा मोटर्स में उसे एक्सिक्यूटिव की नौकरी मिल गयी। कॉलेज ख़त्म होने के साथ ही ज़ुबैर ने नेहा से अपना रिलेशन ख़त्म कर लिया और नेहा का दिल तोड़ने में उसे जरा भी रहम नहीं आया। नेहा को रोती छोड़ ज़ुबैर उसके साथ ब्रेकअप करके अपनी लाइफ में आगे बढ़ चूका था। इस बात को कई साल गुज़र चूका था, अपने नए जॉब और नयी गिलफ्रेंड तनुजा के साथ ज़ुबैर लाइफ में बहुत खुश रहने लगा था। तनुजा से ज़ुबैर की मुलाक़ात ऑफिस के तीसरे दिन हुई जब तनुजा को उसका बॉस बहुत डांट रहा था। आँखों में आंसू लिए जब तनुजा केबिन से बाहर आयी तो ज़ुबैर ने उसे अपना रुमाल आंसू पोछने को दिया और यही से दोनों के रि...